सीता मैय्या ने बनाई थी यहां पर अपनी रसोई, अब नया साल मनाने आते हैं लोग, लेते हैं भोलेनाथ का आशिर्वाद

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नई दिल्ली। आज साल 2018 का आखिरी दिन है। ऐसे में हर कोई साल के अंत और नए साल की शुरूआत के मौके पर परिवार के साथ कहीं न कहीं घूमने जाना चाहता है। आमतौर पर घूमने के शौकीन लोग प्राकृतिक जगहों का चयन करते हैं लेकिन अगर वह जगह प्राकृतिक होने के साथ-साथ पौराणिक और सांस्कृतिक भी हो तो फिर क्या कहना। ऐसे ही एक जगह है झारखंड के लोहरदगा जिले में चितरी डांडू घाट जहां पर जहां वनवास के दौरान सीता माता ने अपनी रसोई बनाई थी। खास बात यह है कि यहां पर नदी के बीचों-बीच भगवान शिव का मंदिर भी है। इसके अलावा यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का नजारा अद्भुत है।

 

ऐसे में पुराने साल के अंत और नए साल के स्वागत के लिए यह जगह बिल्कुल परफेक्ट है। घूमने के लिए यहां पहुंचने वाले लोगों का भी यही मानना है कि जो कोई भी यहां पर आता है वो यहां की प्राकृतिक सुंदरता में खो जाता है। सबसे खास बात यह है कि यह स्थान प्राकृतिक रूप से समृद्ध होने के अलावा यह स्थान ऐतिहासिक रूप से भी खासा समृद्ध है। यहां पर मौजूद सीता चौका और एक गुफा में भगवान शिव की प्रतिमा भी है। यही कारण है कि नए साल के मौके पर यहां लोगों की भीड़ उमड़ पडती है।

माना जाता है कि माता सीता जब प्रभु श्रीराम और अपने देवर लक्ष्मण के साथ जब 14 वर्ष का वनवास काट रहीं थी तो वो इसी रास्ते से गुजरीं थीं। यहां से जाने के क्रम में ही उन्होंने सीता चौका का निर्माण किया था और यहां के पत्थरों में कलाकृति भी बनाई थी। इसके अलावा यहां पर एक नदी भी है जहां पत्थरों की गुफा के बीच भगवान शिव की प्रतिमा विराजमान है। इससे साल भर यहां पर आने वाले पर्यटक भगवान शिव का आशिर्वाद प्राप्त करते हैं।

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