जीएसटी रिटर्न में देरी से सरकार का भरा खजाना, डेढ़ साल में कमांए 4 हजार करोड़

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नर्इ दिल्ली। आमतौर पर टैक्स न भरना एक तरह से असुविधा माना जाता है आैर कर्इ बार तो इसे सरकारी खजाने पर बोझ भी माना जता है। लेकिन जीएसटी रिटर्न भरने में देरी होने से सरकार को फायदा हुआ। इंडियन एक्सप्रेस ने वित्त मंत्रालय के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा है कि 1 जुलार्इ 2017 से लेकर 4 फरवरी 2019 के बीच करीब डेढ़ साल से भी अधिक समय में सरकार को लेट जीएसटी रिटर्न से 4,172.44 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है।


100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से लगता था जुर्माना

बता दें कि देर से जीएसटी रिटर्न दाखिल करने से बचने के लिए सरकार ने सीजीएसटी एक्ट 2017 के सेक्शन 47 के अंतर्गत इस पर जुर्माने का प्रावधान किया है। यदि कोर्इ भी रजिस्टर्ड व्यक्ति तय समय से के बाद जीएसटी रिटर्न दाखिल करता है तो उसे 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना पड़ता है। यह जुर्माना 5,000 रुपए तक भी हो सकता है।

कम हुआ था टैक्स रिटर्न पर जुर्माना

टैक्स बेस को बेहतर बनाने के लिए पहले ही सरकार ने लेट फीस में कमी किया था। अब सीजीएसटी व एसजीएसटी की लेट रिटर्न दाखिल करने पर प्रतिदिन 25 रुपए जुर्माने के तौर पर देय है। ज्ञात हो कि जीएसटी परिषद ने अपने पिछले बैठक में टैक्स रिटर्न में रियायत देते हुए 31 मार्च 2019 तक कोर्इ लेट फीस नहीं लगाने का फैसला किया था।


हर माह 1 लाख करोड़ रुपए नहीं हो पा रहा जीएसटी कलेक्शन

यह रियायत जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-3B व जीएसटीआर-4 को लेकर दिया था। अंतरिम बजट में भी कुल जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपए नहीं होने पर चर्चा किया गया था। पिछले वित्त वर्ष के कर्इ महीनों में कुल जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपए से कम रहा था।

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