ग्राहकों की जेब ढ़ीली कर बैंकों ने भरा अपना खजाना, इस तरह वसूले 2 लाख 88 हजार करोड़ रुपए

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नई दिल्ली। आरटीआइ से मिली जानकारी के अनुसार साल 2013 से लेकर अब तक निजी बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ग्राहकों से दो लाख 88 हजार करोड़ रुपए वसूले हैं। ग्राहकों की जेब सबसे ज्यादा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ढ़ीली की है। निजी बैंकों ने जहां लोगों से एक लाख 12 हजार 154 करोड़ रुपए का राजस्व वसूला है वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एक लाख 76 हजार 278 करोड़ रुपए की वसूली की है।


बैंकों के खाते में आए इतने पैसे

वित्त वर्ष 2013-14 में सार्वजनिक बैंकों ने ग्राहकों से 28,374 करेड़ रुपए वसूले हैं। बात अगर निजी बैंक की करें तो तब ग्राहकों से 21,172 करोड़ रुपए वसूले गए थे। इसके अगले साल 2014-15 में सार्वजनिक बैंक और निजी बैंक ने क्रमश: 29,174 करोड़ और 16,091 करोड़ रुपए वसूले हैं। वित्त वर्ष 2015-16 में सार्वजनिक बैंक ने 31,143 करोड़ रुपए की वसूली की थी और निजी बैंक ने ग्राहकों से 18,244 करोड़ रुपए वसूले थे। साल 2016-17 में सार्वजनिक बैंक और निजी बैंक ने ग्राहकों से क्रमश: 34,927 और 20,133 करोड़ रुपए वसूले थे। वित्त वर्ष 2017-18 में सार्वजनिक बैंक के खजाने में 36,219 करोड़ रुपए और निजी बैंक के खजाने में 23,409 करोड़ रुपए आए थे। वहीं साल 2018 में अप्रैल से सितंबर तक सार्वजनिक बैंक ने ग्राहकों से 16,441 करोड़ रुपए और निजी बैंक ने ग्राहकों से 13,475 करोड़ रुपए वसूले हैं।


ऐसे काटी ग्राहकों की जेब

सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बैंकों द्वारा रिपोर्ट किए गए अन्य परिचालन आय शुल्क में आय में कमीशन, एक्सचेंज और ब्रोकरेज भी शामिल है। आपको बता दें कि ग्राहकों से नेट बैंकिंग से पैसे भेजने, चेक बुक जारी करने, मोबाइल सुविधा और अन्य कई तरह की सुविधाओं के नाम पर शुल्क लिया जाता है। बैंक खाते में न्यूनतम बैंलेंस से कम पैसे रखने पर ग्राहकों से 100 रुपए से अधिक का शुल्क भी लिया जाता है। इसी तरह चेक वापसी पर दोनों पक्षों से सरकारी बैंक 200 से 300 रुपए और निजी बैंक 550 रुपए शुल्क वसूल करते हैं।

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