एनसीएएलटी से आईएलएंडएफएस समूह की 33 कंपनियों मिली कर्ज चुकाने की मंजूरी

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) ने कर्ज से लदी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) समूह की 133 विदेशी और 22 घरेलू कंपनियों द्वारा कर्ज चुकाने की मंजूरी दे दी है। इससे पहले एनसीएलएटी ने कर्ज से लदे समूह की सहयोगी कंपनियों को 90 दिन तक कर्ज चुकाने से राहत दी थी।

समूह पर कुल 91,000 करोड़ रुपए का संयुक्त कर्ज है, जो इसकी 133 सहायक कंपनियों पर है, जिसका गठन देश से बाहर किया गया है, जिसमें आईएलएंडएफएस अफ्रीका इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी, आईएलएंडएफएस ग्लोबल फाइनेंस सर्विसेज (यूके) और आईआईएमएल फंड मैनेजर्स (सिंगापुर) पीटीई लि. शामिल है।

इसके बाद, अब इनमें से कुछ कंपनियों को सहमति की शर्तो के मुताबिक कर्जदाताओं को उनसे लिए गए कर्ज का भुगतान करना होगा। हालांकि इनमें से कई कंपनियां ऐसी हैं, जिनकी वित्तीय हालत खस्ताहाल है, ऐसे में उन्हें नीलामी का सामना करना पड़ेगा।

इन विदेशी कंपनियों के अलावा आईएलएंडएफएस की कुल 169 सहयोगी कंपनियों में से 22 कंपनियां ऐसी हैं, जिनका गठन भारत में हुआ है, उन्हें भी कर्ज स्थगन की राहत मिली हुई थी, जो हटा ली गई है।

इसके अलावा, एनसीएलएटी ने आईएलएंडएफएस समूह और उसकी सहयोगी कंपनियों के 'समाधान प्रक्रिया' के नजर रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डी. के. जैन को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

वर्तमान में समूह की केवल 22 कंपनियों की हालत ठीक-ठाक है। इस श्रेणी की कंपनियों में आईएलएंडएफएस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स, आईएलएंडएफएस सिक्युरिटी सर्विसेज और आईएलएंडएफएस पारादीप रिफाइनरी वाटर समेत अन्य शामिल हैं।

समूह की कंपनियों को समाधान सलाहकार द्वारा पिछले एक साल के नकदी के आधार पर तीन समूह -'ग्रीन', 'अंबर' और 'रेड' में बांटा गया है। अब तक समूह की 169 कंपनियों में से 69 का वर्गीकरण किया गया है।

वर्गीकरण नियम के तहत 'ग्रीन' कंपनियों में वे कंपनियां शामिल हैं, जिनके पास कर्ज को चुकाने का धन है। 'अंबर' वे कंपनियां हैं, जो कर्ज का एक हिस्सा चुकाने में सक्षम हैं, जबकि 'रेड' वर्गीकरण उन कंपनियों का किया गया है, जो खस्ताहाल हैं और कर्ज की वसूली के लिए उनकी नीलामी के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।

पिछले साल सरकार ने एनसीएलटी के आदेश के माध्यम से आईएलएंडएफएस समूह के निदेशक मंडल को भंग कर नया निदेशक मंडल नियुक्त किया था, जिसकी अगुवाई कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदय कोटक कर रहे हैं।

91,000 करोड़ रुपये से लदी इस समूह में सरकारी कंपनियों एलआईसी और एसबीआई की क्रमश: 25.34 फीसदी और 6.42 फीसदी हिस्सेदारी है।

 

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