एअर इंडिया से लेकर जेट एअरवेज तक सभी को हुआ नुकसान, कुछ एेसा एअरलाइंस इंडस्ट्री का हाल

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नर्इ दिल्ली। देश के विमानन क्षेत्र के लिए वर्ष 2018 मिलेजुले अनुभवों वाला रहा। एक तरफ यात्रियों की संख्या, उड़ानों और हवाई अड्डों की संख्या के लिहाज से तेज वृद्धि का क्रम जारी रहा तो दूसरी ओर विमान ईंधन की ऊंची कीमतों ने विमान सेवा कंपनियों की वित्तीय हालत पतली कर दी। यह वर्ष सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया और सार्वजनिक हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता पवनहंस के विफल विनिवेश के साथ ड्रोनों के नागरिक इस्तेमाल की अनुमति के लिए भी जाना जाएगा।

इंफ्रस्ट्रक्चर में हुर्इ बढ़ोतरी
सरकार की पिछले साल शुरू की गर्इ कम किराए वाली क्षेत्रीय संपर्क योजना 'उड़ान’ के कारण कई नये छोटे तथा मंझोले शहरों से सेवाएं शुरू होने से इस साल भी हवाई यात्रियों की संख्या में मजबूत वृद्धि का क्रम जारी रहा। यह लगातार चौथा वर्ष है जब घरेलू मार्गों पर यात्रियों की संख्या 20 फीसदी के करीब बढ़ी है। जनवरी से नवंबर के बीच देश में हवाई यात्रियों की संख्या 12 करोड़, 62 लाख 83 हजार रही जो पिछले साल जनवरी से नवंबर की अवधि के मुकाबले 19.21 फीसदी अधिक है। यह आंकड़ा 2017 में पहली बार 10 करोड़ के पार पहुंचा था और पूरे कैलेंडर वर्ष में 11 करोड़ 71 लाख 76 हजार रहा था। इस साल महज 11 महीने में ही नया रिकॉर्ड बन चुका है। पिछले साल दिसंबर में देश में हवाई अड्डों की कुल संख्या 86 थी जो इस साल बढ़कर 101 हो चुकी है। सिक्किम का पाक्योंग हवाई अड्डा 100वां हवाई अड्डा बना जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। फिलहाल देश में 20 अंतर्राष्ट्रीय और 60 घरेलू हवाई अड्डे हैं। इनके अलावा संयुक्त उपक्रम वाले छह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, कस्टम के आठ हवाई अड्डे और सात राज्य सरकारों के या पूरी तरह से निजी हवाई अड्डे भी हैं।

घरेलू स्तर पर नहीं हुआ कोर्इ विमान हादसा
भारतीय आकाश इस साल भी सुरक्षित रहा। तकनीकी तथा अन्य कारणों से विमान में गड़बड़ी तथा रनवे से विमान के फिसलने की घटनाएं जरूर हुईं, लेकिन सौभाग्यवश इनमें किसी यात्री को कोई गंभीर चोट नहीं आर्इ और न ही किसी की जान गर्इ। सबसे ज्यादा यात्रियों के घायल होने की घटना सितंबर में हुई थी जब मुंबई से जयपुर जा रहे जेट एयरवेज की एक उड़ान में पायलट 'ब्लीड स्विच' ऑन करना भूल गए थे, जिसके कारण केबिन में हवा का दबाव कम हो गया और 30 यात्रियों की नाक से खून निकलने लगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अक्टूबर में साल का सबसे बड़ा विमान हादसा हुआ जब इंडोनेशिया में लॉयन एयर का बोइंग मैक्स विमान तकनीकी खराबी के कारण समुद्र में जा गिरा और सभी 189 यात्री तथा चालक दल के सदस्य मारे गए।

नुकसान में रही एअरलाइंस
कच्चे तेल के दाम बढऩे से पूरी दुनिया में विमान सेवा कंपनियों की वित्तीय स्थिति पतली रही। घरेलू स्तर पर भी विमान ईंधन के ऊंचे दाम के कारण एयरलाइंस नुकसान में रहे। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के परिणाम अब तक आ चुके हैं। इसमें जेट एयरवेज को 262 करोड़ रुपए, इंडिगो को 62.43 करोड़ रुपये और स्पाइसजेट को 42.74 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। एयर इंडिया और विस्तारा पहले से ही घाटे में चल रही है। गो एयर पर भी महंगे विमान ईंधन का दबाव है।

की गर्इ यात्रियों के मद में कटौती
वित्तीय दबाव में एयरलाइंस ने लागत घटाने के लिए कई उपाय किए हैं। देश की तीनों पूर्ण सेवा एयरलाइंस ने एयर इंडिया, विस्तारा और जेट एयरवेज को भी किफायती विमान सेवा कंपनियों जैसे उपायों का सहारा लेना पड़ा है। उन्होंने सबसे पहली कटौती यात्रियों के खाने के मद में की है। कुछ कंपनियों ने अतिरिक्त बैगेज संबंधी नियमों में बदलाव कर मुनाफा बढ़ाने की कोशिश की है तो कुछ एयरलाइंस के वेब चेकइन में हर सीट के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूलने की बात भी सामने आर्इ है।

नहीं बिका एअर इंडिया
घरेलू विमानन क्षेत्र में एयर इंडिया के विनिवेश की पूरी प्रक्रिया और फिर विनिवेश का विफल होना सुर्खियों में रहा। सरकार ने रणनीतिक विनिवेश के तहत कंपनी की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बनार्इ गर्इ थी। लेकिन, किसी बोली प्रदाता के सामने नहीं आने के कारण विनिवेश की योजना टालनी पड़ी। कंपनी पर फिलहाल 55 करोड़ रुपए से ज्यादा का ऋण है और वह सरकारी सहायता तथा परिचालन के लिए नए ऋण के जरिए अपना अस्तित्व बचाये हुए है। सरकार ने अब कंपनी के 29,000 करोड़ रुपए के ऋण अधिग्रहण की योजना बनार्इ है। इसके साथ ही अब वह मूल कंपनी की बजाय एक-एक कर उसकी सहायक इकाइयों के विनिवेश पर ध्यान दे रही है।

पवनहंस का विनिवेश रहा फेल
पवनहंस के लिए भी सिर्फ एक ही बोली प्रदाता के सामने आने के बाद उसका विनिवेश भी विफल रहा। नए सिरे से उसकी विनिवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू की गर्इ है जो अभी जारी है। इस साल एक बड़ा फैसला ड्रोनों के इस्तेमाल को लेकर किया गया। सरकार ने ड्रोन नीति को मंजूरी देते हुए उसके नागरिक इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। नागरिक इस्तेमाल के लिए पंजीकरण 01 दिसंबर से शुरू हो चुका है। हालांकि, अभी ड्रोन से पेलोड ले जाने पर प्रतिबंध है जिससे इसका इस्तेमाल सामानों की होम डिलिवरी में नहीं हो सकेगा। बाद में उसकी भी अनुमति देने की योजना है।

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